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श्रावण सोमवार व्रत की विधि – संपूर्ण जानकारी कैसे करे कि व्रत में कोई त्रुटि ना रह जाए।।

 श्रावण सोमवार व्रत की विधि – संपूर्ण जानकारी  कैसे करे कि व्रत में कोई त्रुटि ना रह जाए।। सावन के सोमवार।। 

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"श्रावण मास" हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना गया है। यह महीना विशेष रूप से "भगवान शिव "को समर्पित होता है। इस महीने के हर सोमवार को व्रत रखकर शिवजी की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि श्रावण सोमवार का व्रत रखने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, संतान सुख प्राप्त होता है, और मनचाहा जीवनसाथी भी मिलता है।

इस पवित्र व्रत की पूरी विधि, महत्त्व, कथा,और इससे जुड़ी सावधानियां।

इस पवित्र व्रत के महत्व को समझते हैं। हमारा विश्वास और आस्था इस व्रत से जुड़ी हुई है। इस लिए आवश्यक है कि हम विस्तार पूर्वक हर पहलू को जाने। 

श्रावण सोमवार व्रत का महत्त्व। 

श्रावण मास में भगवान शिव को जल अर्पित करने और व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। खासकर महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है। कुंवारी कन्याएं इस व्रत को अपने लिए "मनचाहा वर प्राप्ति" के लिए करती हैं, वहीं विवाहित स्त्रियाँ "पति की लंबी उम्र" और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए।


व्रत के साथ जुड़ी हुई मान्यताएं। 


1.यह व्रत करने से शिवजी प्रसन्न होकर शीघ्र फल प्रदान करते हैं।

2. यह व्रत रोग, संकट, दरिद्रता और पापों से मुक्ति देता है।

3. भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा बनी रहती है।

व्रत रखने की तिथियाँ (2025) 


श्रावण महीने के सोमवार इस प्रकार हैं (उत्तर भारत पंचांग के अनुसार):-

1. 21 जुलाई 2025

2. 28 जुलाई 2025

3. 4 अगस्त 2025

4. 11 अगस्त 2025


व्रत की संकल्प लें --

  • व्रत की पूर्व रात्रि को सात्विक भोजन लें।
  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  • भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

संकल्प मंत्र --

"मैं (अपना नाम), भगवान शिव की कृपा प्राप्ति हेतु श्रावण सोमवार व्रत करता/करती हूँ। कृपया इसे स्वीकार करें।"


श्रावण सोमवार व्रत की पूजा विधि:-

सामग्री:-

दूध, दही, शहद, गंगाजल

 बेलपत्र, भस्म, चंदन

 धूप, दीप, फल, फूल

शुद्ध जल, अक्षत, रोली

 पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर और घी का मिश्रण)


पूजा विधि:-

1. शिवलिंग को स्नान कराएं। 
   सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।

2. पूजन सामग्री अर्पित करें। 
   बेलपत्र, भस्म, चंदन, धूप, दीप, फूल आदि अर्पित करें।

3. शिव मंत्रों का जाप करें। 
   निम्न मंत्रों का 108 बार जप करें:

   ॐ नमः शिवाय
   ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्… (महामृत्युंजय मंत्र)

4. शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें। 

5. आरती करें। 
   शिव आरती और पार्वती जी की आरती जरूर करें।

6. प्रसाद वितरण करें। 
   पूजा के अंत में व्रत का फल, दूध या हल्का प्रसाद ग्रहण करें।


व्रत का नियम:-

इस दिन केवल फलाहार करें (दूध, फल, मखाना, साबूदाना खिचड़ी, आदि)।

 व्रत के दिन नमक न खाएं (यदि संभव हो)।

 दिनभर शिव नाम का जाप करें और सात्विक आचरण रखें।

 शाम को भी दुबारा शिवजी की पूजा करें।


श्रावण सोमवार व्रत की कथा।। 

बहुत समय पहले एक निर्धन ब्राह्मण था। वह सच्चा शिव भक्त था और श्रावण महीने में सोमवार का व्रत करता था। एक दिन राजा की बेटी गंभीर रोग से पीड़ित हो गई। कई वैद्य आए पर ठीक न कर सके। तब एक सपने में शिवजी ने बताया कि ब्राह्मण के व्रत के पुण्य से रोग दूर होगा। राजा ने ब्राह्मण को बुलाकर पूजा करवाई और व्रत का फल बेटी को अर्पित किया। चमत्कार से वह राजकुमारी ठीक हो गई।
 'तब से श्रावण सोमवार व्रत का महत्त्व और अधिक बढ़ गया।'


महिलाओं के लिए विशेष महत्व।। 

कुंवारी लड़कियाँ – मनचाहा वर पाने के लिए

विवाहित महिलाएँ – पति की आयु, स्वास्थ्य और प्रेम बनाए रखने हेतु

बांझपन या संतान की इच्छा रखने वाली स्त्रियाँ – संतान सुख की प्राप्ति के लिए


व्रत में सावधानियाँ।। 


झूठ, क्रोध, तामसिक भोजन से बचें।

 व्रत का मज़ाक या प्रदर्शन न करें।

 संभव हो तो ब्रह्मचर्य का पालन करें।

 पूजा में बेलपत्र, आक, धतूरा आदि शुद्ध रूप से चढ़ाएं।


व्रत खोलने की विधि।। 

पूजा के बाद या अगले दिन सूर्योदय के समय व्रत खोलें।
 सबसे पहले भगवान शिव को जल अर्पित करें।
 सात्विक भोजन ग्रहण करें। (हर स्थान और प्रदेश के अनुसार भोजन अलग अलग हो सकता हैं) 


निष्कर्ष।। 


श्रावण सोमवार व्रत न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मन की शुद्धि, संकल्प की शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है। यदि सच्चे मन से इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाए तो भगवान शिव जरूर प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।



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